"सालासर बालाजी मंदिर में आपका स्वागत है"

सालासर बालाजी

imageसालासर बालाजी मंदिर या सालासर धाम भारत में भगवान हनुमान के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। यह मंदिर संत मोहनदासजी द्वारा १८ वीं सदी में बनाया गया था। इस मंदिर में भगवान हनुमान का रूप अनूठी है। मुख पर दाढ़ी, मूंछें, और सुंदर है।  माथे पर तिलक और विकट भौहों है, जो उन्कि सुन्दर्त को अध्बुद बनाता है।

मन्दिर का उद्गम

Photo1आज से लगभग ३१० वर्ष पूर्व ठाकुर बनवारीदास जी नौरंगसर (चुरु) मे रहते थे। उनके पुत्र तुलछीरामजी के चार पुत्र थे।जिसमें सालमसिंह सबसे बडे थे। ये चारों भाइ चार स्थानों में अलग अलग रेहते थे, जिनके नाम क्रमशः नौरंगसर, तिडोकी, जुलियासर तथा सालमसर है। ठाकुर सालमसिंह के उक्त स्थान पर निवास करने पर “तैतरवालों की ढाणी” को ही “सालमसर” नाम से जाना जाने लगा और कालन्तर मे सालमसर का नाम ही सालासर है।

चमत्कारी सालासर​

Photo14राजा देवीसिंह के हिृदय में भगवान बालाजी के दर्शन की अभिलाशा तीव्र​ हुइ और वह जब सालासर पहुँचे तब भक्त मोहनदासजी ने उनकी मनोकामना की पूर्ति के लिए श्रीबालाजी को एक श्रीफ़ल (नारियल) अर्पण करने को कहा और उसी श्रीफ़ल को समीपस्थ जाल वृक्ष में बाँधने की आग्या दी। श्रीमोहनदासजी ने कहा की राजन​, आपके एक सम्बन्धि महोवत सिंह हैं, जो दुजोद ग्राम मे निवास करते हैं, उन्ही की कन्या से आपको एक पुत्र की प्राप्ति होगी, किन्तु देवयोग से वह पुत्र विकलांग होगा, पर उससे आप के कुल की मान प्रतिष्ठा बढेगी।