आइए सालासर धाम

आइए सालासर धाम

आइए सालासर के धाम।

बन जाते हैं बिगड़े काम।।

बड़ी ही पावन सालासर धरती,

पतितों को भी मिल जाए मक्ति।

आकर जो बजरंग गुण गाए,

जन्म-जन्म के पाप छुड़ाए।।

पावन धरती को हम करते हैं कोटि प्रणाम।।

बड़ा है मंडप ऊंचा तंदूरा,

चांदी चढ़ा है भवन इनका पूरा।

ज्योति पंुंज मुख तेज विराजे,

घंटा ध्वनि पल पल में है बाजे।।

दर्शन करें इनका हम, मिट जाते जीवन के गम।।

दूर से चलकर भक्त हैं आते

दर्शन बारी बारी हैं पाते।

अपने मन के दुःख है सुनाते,

सुनते सबकी जो इनको सुनाते,

ऐसा है सालासर धाम, होते यहां पूरण काम।।