आओ आओ घर में

आओ आओ घर में

आओ आओ घर में, मंगल वाली रात

राम लला मैं दूंगी, तुझको रोटी और भात

आओ जी मेरे घर आओजी……

मेरे प्रभु राम जी को, तूने जितवाया है

तेरी मैं रसोई करूँ, ये मन में आया है

ढूंढ़ती फिरी मैं तुझको, कब हो मुलाकात

आओ जी मेरे घर आओजी……

पूरी और कचौरियों के साथ हरी सब्जियाँ

चटनी, अचार, लौंगी, मीठी मीठी नुक्तियाँ

फिर भी ना पेट भरा….. बीती सारी रात…..

आओ जी मेरे घर आओजी……

तुलसी का पत्ता फिर सीता माँ ने डाला है

महिमा थी राम जी की, भूख को संभाला है

‘शर्मा’ देते हैं प्रभु अपनों का साथ

आओ जी मेरे घर आओजी……