काम निराला अंजनी लाला

काम निराला अंजनी लाला

(तर्ज – कान में झुमका, चाल में ठुमका…. फि. सावन भादो)

जय बजरंगी जय हनुमान, जय बजरंगी जय श्री राम-2

लाल लंगोटा हाथ में सोटा, राम नाम को रटके-2

लांघ गये विकराल समन्दर पवन पुत्र बेकटके।।

ओ तेरा काम है निराला, माता अंजनी का लाला।।

जय बजरंगी…..

सारा जग घबराया है, अंधकार सा छाया है,

बात किसी के कोई समझ ना आई है।

देव सभी बेजार हुए, नर नारी लाचार हुए,

राजा इन्द्र को जाके, खबर ये सुनाई है।

दौड़े सब कोई सब रोते, चिल्लाते, घबराते,

कुछ भी दे ना दिखाई। जय हो ऽऽ

बालपने में सूरज को फल समझ के बजरंग गटके,

पूर्व दिशा में लाल-लाल तुम देखके फौरन झपटे।।

ओ तेरा काम ….

असुर संहारे बड़े-बड़े, अक्षय को पटके खड़े-खड़े

वाटिका रावण की जाके, पल में उजाड़ी है।

हाहाकार मचाई है, लंका फूंक जलाई है,

विजय की पताका जाके, तुमने झुलाई है।

तुम हो सभी के रखवाले, मतवाले, दिलवाले,

श्री राम के दीवाने।। जय हो ऽऽ

सीता की खबर राम को फौरन दिये पलटके।

लगा लिये सीने से रघुवर, बजरंगी जी को झट से।।

ओ तेरा काम ….

लक्ष्मण जी मूर्छा खाये, रामचन्द्र जी घबराये,

सारी सेना में जैसे, मातम सा छाया है।

हनुमान जी फौरन धाये, पर्वत ही उठा लाये,

बंूटी पिलाके प्राण लखन के बचाये हैं।

अंजनी का लाला है निराला,   आन वाला मतवाला,

बजरंगी देर ना लगाई। जय हो ऽऽ

चले पवन की चाल, राह में कभी ना हनुमत अटके।

सूर्याेदय से पहले आये, फौरन वहाँ पलटके।।

ओ तेरा काम ….

जो हनमत का ध्यान धरे, उसका वो कल्याण करे,

सारी बाधाओं को वो, पल में मिटाते हैं।

सुख सम्पत बरसाते हैं, बिगड़े काम बनाते हैं,

शर्मा जो सच्चे मन से, गुण उनका गाते हैं।

जपते हैं जिनको, सारे प्राणी, जो भी ज्ञानी, बड़े दानी,

बजरंगी अंजनी के लाला।। जय हो ऽऽ

भूत पिशाच कभी न ‘लख्वा’ पास न उसके कटके,

पढे़ जो नित हनुमान चालीसा, रहे जगत में डटके।।

ओ तेरा काम ….