कीर्तन में आना पवन कुमार

कीर्तन में आना पवन कुमार

(तर्ज – बार-बार मैं तोहे क्या समझाऊँ…. फि. आरती)

राम सिया को लेकर आना, आना सह परिवार।

कीर्तन मे मेरे आ जाना, पवन कुमार।

मृदंग ढोल नंगाडे गूंजे-2

झांझर की झनकार।। कीर्तन में….

भाई भरत को लाना, लक्ष्मण को लाना।

शिव शंकर को लाना, कभी भूल ना जाना।।

भक्त बुलाते, भजन सुनाते-2 करते जै-जै कार।।1।। कीर्तन में…..

कृष्ण को संग ले आना, राधा को लाना।

नारद को लाना, और ब्रह्मा को भी लाना।।

छेड़ दिया सब भक्तजनों ने-2 मन वीणा के तार।।2।। कीर्तन में…..

सुमति को संग लाना, कुमति को हटाना।

डमरू नाद बजाके, तू भी रंग जमाना।।

नाच के तू हम सबको नचाना-2 शिवजी के अवतार।।3।। कीर्तन में…..