दर्शन प्रार्थना

दर्शन प्रार्थना

(तर्ज – ल्यादे रे ल्यादे झमकूड़ी लाड़ी ल्यादे….)

आज्या ओ आज्या भगतों के मान बढ़ाज्या।

सालासर हनुमान मनायां, आके दर्श दिखाज्या।। टेरा।।

म्हे बालक लघुमति के ना देखे रूप जाति के।

आस लगाये बैठे ना झूटे एक रती के।

आजीवन ब्रह्मचारी भारी राम के दास कहाज्या।।1।। आज्या….

घोटा साथ में ल्याणा, दुश्मन मार भगाणा।

राम की माला गल में हो लाल लंगोटा बाणा।।

सियाराम जपते ही आना, गढ़ लंका पर छाज्या।।2।। आज्या….

मैं बणग्या दास तुम्हारा, कर देना पौ बारा।

तुझ बिन जी नां लागै सुणले पवन कुमारा।।

दुनियां फिरती फिरै पालतू,  इनको पाठ पढ़ाज्या।।3।। आज्या….

शहर सालासर आऊँ, दाता दर्शन थारा पाऊँ।

फूलचन्द ‘प्रेमी’ कहै, प्रकाश ‘चन्दाणी’ ल्याऊँ।।

रात कटे थारे चरणों में आके साज बजाज्या।।4।। आज्या…