दर्शन प्रार्थना

दर्शन प्रार्थना

(तर्ज: ल्यादे रे ल्यादे झामकुडी लाड़ी ल्यादे…)

आज्यो ओ आज्या भगतों के मान बढ़ाज्या।।

सालासर हनुमान मनावां, आके दर्श दिखाज्या।।

।। टेर।।

म्हे बालक लघुमति के ना देखे रूप जति के।

आस लगाए बैठे ना झूठे एक रती के।।

आजीवन ब्रह्मचारी भारी राम के दास कहाज्या।।

आज्या …….

घोटा साथ में ल्याणा, दुश्मन मार भगाणा।

राम की माला गल में हो लाल लंगोटा बाणा।।

सियाराम जपते ही आना, गढ़ लंका पर  छाज्या।।

आज्या …….

मैं बणग्या दास तुम्हारा, कर देना पौ बारा।

तुझ बिना जी नां लागै, सुणले पवन कुमारा।।

दुनिया फिरती फिरै, फालतू इनको पाठ पढ़ाज्या।।

आज्या …….

शहर सालासर आऊं, दाता दर्शन थारा पाऊं।

फुलचंद ‘प्रेमी’ कहै, प्रकाश ‘चंदाणी’ ल्याऊं।।

रात कटे थारे चरणों में आके साज बजाज्या।।

आज्या …….