दुर्गा वन्दना

दुर्गा वन्दना

(तर्ज – म्हारी मंगेतर तथली वाली……..)

मात भवानी शेरों वाली, ले दुष्टों की जान,

जग गुणगान करे।। टेर।।

ऊंचे शिखर पर ध्वज विराजे, माने मुगल पठान,

जग गुणगान करे।। 1।। मात भवानी…….

शेर सजाके, घूमैं वन में, गंूजे बियावान,

जग गुणगान करे।। 2।। मात भवानी…….

देवों की  देवी कहलावे, मुख में नागर पान,

जग गुणगान करे।। 3।। मात भवानी…….

भगतों की नित प्रतिपाली, दे दुर्गा वरदान,

जग गुणगान करे।। 4।। मात भवानी…….

जो वर मांग्या पाया मैया, ‘प्रेमी’  धरे ध्यान,

जग गुणगान करे।। 5।। मात भवानी…….