देखो नुक्ती के लड्डू

देखो नुक्ती के  लड्डू

मेरी लांगुरिया को भाते हैं देखो नुक्ती के लड्डू

सब सेवक भोग लगाते हैं, देखो नुक्ती के लड्डू

खट्टे और चटपटे देख हंस जाते

कहीं कहीं नमकीन भी खाते

झट मीठा चट कर जाते हैं,

देखो नुक्ती के लड्डू……

दही-भल्ला हो चाहे सौंठ चटनी

फांक  भी अचार की कभी-कभी चखनी

देखो नुक्ती के लड्डू……

पापड़ खा मौज उड़ाते हैं

देखो नुक्ती के लड्डू……

भांग-ठंडाई से तो कोसों ही दूर हैं

दाल-बाटी चूरमा के आगे मजबूर हैं

सवामनी करो तो आते हैं,

देखो नुक्ती के लड्डू……

भक्तों की भावना में इनको सरूर है

चाहे एक बरफी दो, वो भी मंजूर है

‘शर्मा’ ये उछलकर खाते हैं,

देखो नुक्ती के लड्डू……