पावन सालासर आंगन

पावन सालासर आंगन

(तर्ज – सोना कितना सोना है सोना जैसा …. फि.  हीरो नं0 1)

पावन कितना पावन है सालासर का ये आंगन।

भक्तों की है भीड़ लगी, करते हैं तेरा दर्शन-2

प्रकटे हैं, प्रकटे हैं, प्रकट हुए हैं, बाला सालासर आंगन।। टेर।।

अंजनी लाला प्रकटे हैं मोहन को सपता देकर,

गुलशन को  महकाया है, दर्शन तो अपना देकर-2

आते हजार, करते हैं पार,

नैया संवारते भगवन।।1।। प्रकटे हैं…..

अन्दर ज्योति अखण्ड जले, बाहर तेरा भोग लगे,

मंदिर शिखरों से हैं सजे, नित्य कृपा की धारा बहे-2

रोता जो आवे, हंसता वो जावे,

मिट जाते उसके भव बंधन।।2।। प्रकटे हैं…..