बचपन का स्मरण

बचपन का स्मरण

(कव्वाली) (फि. जय बजरंग बली)

शेर – अब जागो हे अंजनी कुमार, लंका की ओर प्रस्थान करो

हे भूतकाल के विकट वीर तुम, वर्तमान निर्माण करो।

हम सब चिन्ता में डूबे हैं, माता का पता लगाओ तुम।

दुखियों का दुखड़ा दूर करो, संकट मोचन कहलाओ तुम।।

ुकुछ याद करो अपना पवनसुत वो बालपन।

विद्युत की गति जिसमें थी, अद्भुत वो बालपन।।

दुनिया थी दंग देख तुम्हारी उड़ान को।

तुमने हिला के रख दिया था आसमान को।।

आकाश तुम्हारे लिए था एक अखाड़ा।

जिसने भी ली टक्कर, उसे पल भर में पछाड़ा।।

बिजली की तरह लपके थे सूरज की तरह तुम-2

मुखड़े में छिपा करके, दिवाकर को किया गुम-2

तुम खा गये छड़कते हुआ अग्नि का गोला।

ताकत तुम्हारी देखकर ब्रह्माण्ड था बोला।।

हनुमान जी-2 कहाँ गई वो शक्ति विलक्षण।।1।। कुछ याद…..

फिर एक नया दुश्मन, तुम्हें ललकारने लगा। (राहू)

आँखें दिखाके शेखियाँ बधारने लगा।।

उसको भी मारी लात तुमने बात बात में।

पापी को किया माफ तुमने हाथ हाथ में।।

जब राहू गया हार, तो फिर इन्द्र भी आया-2

झुंझला के उसने तुमपे अपना वज्र चलाया-2

अंत मंे सब हो गया झगड़ों का सफाया।

सब देवों ने मिल के तुम्हे बजरंग बनाया।।

पर आज है-2 कसौटी तेरी केसरी नन्दन।।2।। कुछ याद…..

तुम शक्तिपुँज हो, किसी से डरते नहीं सकते-2

ऐसा न कोई काम, जो तुम कर नहीं सकते-2

उठो छलाँग मारो, बजरंग बली-2

आकाश को ललकारो, बजरंग बली, उठो बजरंग बली…..

भीषण रूप धारो, अब बजरंग बली-2 (उठो बजरंग बली)

संकट से तुम उबारो बजरंग बली…. कुछ ……