बजरंगी मान रखिये

बजरंगी मान रखिये

(तर्ज-तुम ना मिलो तो हम घबराये….)

तुम्हीं हो संगी, आ बजरंगी, धरूँ तुम्हारा ध्यान।

मान मेरा राखिये….। टेरा।।

राम पे संकट आया, थारा ही शरणां लिया था।

लंकपुरी में जाके जनक सता का पता किया था।।

घर घर जाके,  आग लगाके,  असुरों का दे ज्ञान।

मान मेरा राखिये….।।1।। तुम्हीं…..

ेपे तीर चलाया, रावण का मेघनाद खींचके।

सुधबुध खोदी सारी पड़ग्या लोचन मींचके।।

द्रोणाचल जाके, बूंटी ल्याके, बचा लिये थे प्राण।

मान मेरा राखिये….।।2।। तुम्हीं…..

अहिरावण लेके राम लखन को जाल में।

पीछा करके ढूँढे़ तुम पापी को पाताल में।।

ना देर लगाई, धूल चटाई, काटी पल में रात।।

मान मेरा राखिये….।।3।। तुम्हीं…..

नैया अटकी बीच में पार  लगाद्यो बाबा आनके।

दीन हीन दुखियों को निर्बल बालक जानके।।

फूलचन्द कहै बणा छन्द, करूँ सुबह शाम गुणगान।।

मान मेरा राखिये….।।4।। तुम्हीं…..