बाला का आसरा

बाला का आसरा

(तर्ज-यारा ओ यारा मिलना हमारा… फि. जीत)

दोहा – बाला ओ बाला, पहना है बाना, हमने तो राम रंग का,

तू है रखवाला अपने भक्तों का, हमको तेरा आसरा।। टेर।।

तू ही हमको तारेगा, पार लगायेगा,

और तूफानों से हमको बचायेगा,

मेरा कोई और ना तेरे सिवा।। बाला….

मैं तेरा दास हूँ, तू ही है दाता मेरा,

और तो कौन है तेरे सिवा, अब मेरा-2

मैं मेरी आस में कब से यहाँ हूँ खड़ा,

ये सुना है बालाजी, दानी तू सबसे बड़ा,

अंजनी के लाला, देर न करना,

काम बनाना बिगड़ा मेरा।। बाला…….

बाला के रंग में भक्त रंगे हैं सभी,

कोई भी काम हो, रूकता नहीं है कभी-2

आस है बस तेरी, तू ना भुलाना कभी,

मनसे तू याद कर बाबा आयेंगे अभी,

तेरे दीवाने, गाये ही गाये,

एक लगन से जय राम की।। बाला ……….

बाला क्यों छाई है घनघोर काली छटा,

जिसने भी ध्याया है, काम उसी का पटा-2

बाला की ज्योति से, जग में उजाला बड़ा,

दे तेरी रोशनी, मन में अंधेरा बड़ा,

बीच भंवर में फँस गई नैया, पार करना बनके खिवैया।।

बाला ओ…..