बाला से विनय

बाला से विनय

(तर्ज-सन्देश आते हैं, हमें तड़पाते हैं…. फि. बार्डर)

सालासर आते हैं, सन्देसे लाते हैं,

मुरादे पाते हैं, वो कष्ट मिटाते हैं,

कि दर्शन दिखाओगे-2

कि बिगड़ी बनाओगे, कि तुम बिन ये मन सूना सूना है।।टेर।।

महाबलशाली ने, गदाधारी ने, लगाया डेरा है, दुष्टों को घेरा है,

लगा है मेला भारी है, मंगल शुभकारी, महकता गुलशन यहां,

चमकता अतिशय यहां, शरण जो आते हैं, वो चोला चढ़ाते हैं

वो बिगड़ी बनाते हैं, झोली भर लाते हैं,

वो किस्मत वालों ने, मुकद्दर वालों ने,

तरसते नैनों ने, और पूछा है डरती निगाहों ने।

कि दर्शन….

यहां कोई नाचे हैं, यहां कोई खेले हैं, यहां कोई गाये हैं,

यहां कोई झूम है, झोली हो चाहे दीवाली, आते हैं भक्त सवाली,

सुशोभित मंदिर है भारी, विराजे शक्तिशाली,

हवा के झोंकों ने, घटा के मेघों ने, महकती सुबहों ने,

ढलती हुई शामों ने, लचकते झूलों ने,

महकते फूलों ने, भटकती कलियों ने,

और पूछा है राह की गलियों ने

कि दर्शन…..