भगत घणा हरषावे रे

भगत घणा हरषावे रे

(तर्ज: रसिया छम छम पायल बाजै रे….)

थारा भगत घणां हरषावे रे।

सालासर के मंदिर में थारो दर्शन पावे रे।। टेर।।

गले जनेऊ हाथ में घोटा कानों कुंडल सोहे।

रूप निराला राम की माला भगतों का मन मोहे।।

दर्शन करके जी बहलावे रे।।

सालासर …………..

लड्डू पतासा चढ़ते खासा नारेलों की ढेर।

मावा मिश्री खीर चूरमा चौमूं वाले बेर।।

सच्चे मन से भोग लगावे रे।।

सालासर …………..

भारत के कोने-कोने से आते नर और नार।

नोबन और नगाड़ा बाजे टाली की झणकार।।

भक्तजन झांकी खूब सजावें रे।।

सालासर …………..

जाओ मतना दूर छोड़के हिरदे बारहों मास।

पैदल आके दर्शन पावे ढाणी का प्रकाश।।

फूलों ‘प्रेमी’ महिमा गावे रे।।

सालासर …………..