माँगते दान

माँगते दान

(तर्ज – सिर पर टोपी लाल, हाथ में रेशम रूमाल….)

श्री दो जाँटी हनुमान, माँगते भगत खड़े हैं दान,

देर मत आज करो।। टेर।।

जंगल मंे मंगल होते म्हे  देख्या शहर फतेहपुर में।

गाँव गली बस्ती नगरी और देश पुजरया घर घर में।।

कलियुग में दरते ध्यान, करते निसदिन सब गुणगान,

देर मत आज करो।।1।।

ज्ञान बताओ राह दिखाओ, बात नहीं बर्णे की।

हीरे मोती कोन्या चाहिए, पूजा माँगते चरणों की।

सुण बाबा मेरी बात, रहूँ सेवा में दिन रात,

देर मत आज करो।।2।।

छाया अन्धेरा भटके राही शरणा तेरा चाहते।

थारे बिना ना और जगत में ध्यान तुम्हारा ल्याते।

आते गाते और बजाते, बाला पूड़ी दाल चढ़ाते,

देर मत आज करो।।3।।

दर्शन जब तक ना देवोगे वापिस हम नहीं जायेंगे।

फूलचन्द कहै ‘मित्र मण्डल’ के सागै भजन सुणायेंगे।

तुम ही हो प्रतिपाला बाला, तुझ बिन कौन रखवाला,

देर मत आज करो।।4।।