मांगते दान

मांगते दान

(तर्ज: सिर पर टोपी लाल, हाथ में रेशम रूमाल….)

श्री दो जांटी हनुमान, मांगते भगत खड़े हैं दान,

देर मत आज करो।। टेर।।

जंगल में मंगल होते म्हे देख्या शहर फतेहपुर में।

गांव गली बस्ती नगरी और देश पुजरया घर घर में।

कलियुग में धरते ध्यान, करते निसदिन सब गुणगान।।

देर मत आज करो।।

ज्ञान बताओ राह दिखाओ बात बताओ वर्णों की।

हीरे मोती कोन्या चाहिए पूजा मांगते चरणांे की।

सुण बाबा मेरी बात, रहूं सेवा में दिन-रात।

देर मत आज करो।।

छाया अंधेरा भटके राही शरण तेरी चाहते।

थारे बिना ना और जगत में ध्यान तुम्हारा ल्याते।

आते गाते और बजाते, बाला पुड़ी दाल चढ़ाते,

देर मत आज करो।।

दर्शन तब तक ना देवोगे वापिस हम नहीं जाएंगे।

फूलचंद कहै ‘मित्र मंडल’ के सागै  भजन सुणाएंगे।

तुम ही हो प्रतिपाला बाला, तुझ बिन कौन रखवाला,

देर मत आज करो।।