माया बाला जी की

माया बाला जी की

(तर्ज – परदेशी परदेशी जाना नहीं…)

(फि0 – राजा हिन्दुस्तानी)

बाला रे बाला रे बाला  मेरे ओऽऽऽ बाला हो बाला।

मां अंजनी के लाला,  तेरी माया निराली….

बाला रे…..।। टेर।।

रामचन्द्र के  सारे काजा हो बाला।

समुद्र ऊपर बांधे पाजा हो बाला।।

माँ सीता का पता लगाया हो बाला।

लखन के तुमने प्राण बचाये हो बाला।।

माँ अंजनी के लाला …………।।1।। तेरी।।

सबकी तू सुनता है बजरंग हो बाला।

कलियुग में तेरी जय-जय  होवे हो बाला।

पलभर में विपदा सबकी रहती हो बाला।

अटके काम भक्तों के करता हो बाला।।

माँ अंजनी के लाला …………।।2।। तेरी।।

तेरी महिमा कहाँ तक वरणू हो बाला।

अब मेरी अरदास सुनते हो बाला।

‘मनोज’ की पूरी करना दिल की आशा।

दिन रात करूँ गुणगान तेरा मैं हो बाला।।

माँ अंजनी के लाला …………।।3।। तेरी।।