रणथम्भौर गणेश मन्दिर

ranthamboreयह भगवान गणेश के सबसे प्रसिद्ध और सबसे पुराने मंदिर से एक है। इस गणेश मूर्ति को प्रथम गणेश या त्रिनेत्र गणेश के रूप में जाना जाता है। पूरी दुनिया में यह एक ही मन्दिर है जहाँ श्री गणेश अपने पूर्ण परिवार,  दो पत्नी -रिद्धि सिद्धि और दो पुत्र -शुभ लाभ, के साथ विराजमान हैं। भगवान गणेश शिक्षा, ज्ञान, बुद्धि, सौभाग्य और धन के देवता हैं। श्री गणेश सभी  दु:ख, कठिनाइयों को हर लेते हैं। जो भी यहाँ सच्ची भक्ति के साथ आता है उसको  ज्ञान, सौभाग्य और समृद्धि प्रदान की जाती है ।

यह मन्दिर दक्षिण पूर्व राजस्थान के सवाई माधोपुर मे स्थित रणथम्भोर नेशनल पार्क में है। यह कोटा से ११० किमि उत्तर पूर्व में और जयपुर, जो कि सबसे नजदीकि हवाई अड्डा है, उसे १३० किमि दक्षिण पूर्व में स्थित है। यह मन्दिर सालासर से लगभग ३०० किमि दूर है।

यह मन्दिर रणथम्भौर किले के अन्दर है। यह कहा जाता है कि १२९९ में राजा हमीर और अल्लाउद्दीन खिल्जी के बीच में युद्ध अनेक वर्षों तक चला। इस युद्ध के दौरान राजा हमीर के स्वप्न मे भगवान गणेश ने उन्हें आश्वासन दिया कि उनकी विपत्ति जल्द ही दूर हो जाएगी । उसी सुबह किले की एक दीवार पर तिनेत्र गणेश जी की मूर्ति अन्कित हो गयी । जल्द ही युद्ध समाप्त हो गया । युद्ध समाप्त होने के उपरान्त हमीर राजा ने वहाँ गणेश जी का मन्दिर बनवाया और वहाँ रिद्धि सिद्धि सहित शुभ लाभ की मूर्ति भी स्थापित की। गणेश चतुर्थी के दिन यहाँ मेला लगता है जहाँ श्रद्धालु भारत के हर कोने से दर्शन के लिए आते हैं।