लाडू चूरमा भोग लगाऊं

लाडू चूरमा भोग लगाऊं

लाडू चूरमा भोग लगाऊं, मेरी हट जाए मजबूरी

मीठा, बूरा, दाल बाटी, बांटूं, बाबा हलवा पूरी।

भूत प्रेत ने लगा दिया है मेरे घर में डेरा

सांकल से बंधा हुआ हूँ चारों तरफ अंधेरा

अपनों ने मंुह मोड़ लिया है कर ली सबने मुझसे दूरी

मीठा, बूरा…..

श्री राम को शीश नवाकर, शरण आपकी आया

बड़े भाग से घाटे वाले, तुम्हारा दर्शन पाया

भैरों लाल को पुए चढ़ाके, कर ली मैंने जी हजूरी

मीठा, बूरा…..

प्रेतराज सरकार निराले, खो दो बंधन ताला

खुशियाँ बांट रहे हो सबको, मैं सेवक मतवाला

‘शर्मा’ खाली गया ना कोई, सबकी इच्छा होती पूरी

मीठा, बूरा…..