श्री सालासर हनुमान बत्तीसा

श्री सालासर हनुमान बत्तीसा

दोहा – श्री नमो सीतापते भक्तजनों के हेत।

सालासर हनुमान का, बत्तीसा सुख देत।।

नमो मारुति नाम पवित्रा। नमो सुग्रीव के साँचे मित्रा।।

नमो नाम हनुमान उजागर। नमो ज्ञान बल विद्यासागर।।

नमो पिता  केसरि  कपिराई। नमो आपकी अंजनी माई।।

नमो भवानी पति अवतारा। नमो सिया माता के प्यारा।।

नमो राम के भक्त उदारा। नमो अंजनी मात दुलारा।।

नमो अष्ट सि(ि के दायक। नमो राम के प्यारे पायक।।

नमो सालासर के महाराजा। नमो भक्त की राखो लाजा।।

नमो अंग सिन्दूर सुहावे। दर्शन कर मन इच्छा पावे।।

नमो दन बन्धु कपि  स्वामी। हनुम बारम्बार नमामी।।

नमो तपस्वी मोहनदासा। प्रकट भये प्रभु जिनके पासा।।

मम संकट  प्रभु दूर करोगे।  अन धन के भण्डार भरोगे।।

अंजनी-नन्दन सब दुःख हारी। कृप करो द्रोणागिरि धारी।।

वज्र शरीर स्वर्ण सम सोहे। दर्शन कर भक्तन मन मोहे।।

मणि मन्दिर की शोभा भारी। सुबरन छत्र चाँदी की झारी।।

लाल ध्वजा और लाल लंगोटा। संकट हरन देव तुम मोटा।।

बिपति निवारन संपति दाता। भक्त शिरोमनि हरि रंगराता।।

पवन पुत्र बजरंगी बाला। जय हो श्री महावीर कृपाला।।

रोग दोष को दूर हटावे। जो नर प्रीति से कपि गुन गावे।।

पूर्णमासी को दर्शन कीजे। मारुत सुत का ध्यान धरिजे।।

मंगलवार शनिवार वारा। दर्सन कर भव उतरे पारा।।

अन्य बार को प्रभु गुन गावे। सुख संपति नाना बिधि पावे।।

बाँझ नार जो ध्यान लगावे। निश्चय पुत्रवती हो जावे।।

भक्तों में तुम मुकुट मणि हो। निरधरया आधर धणी हो।।

जो जन आवे सरण तुम्हारी। तिनकी करो सदा रखवारी।।

असरण सरण भक्त हितकारी। कृपा करो शंकर अवतारी।।

स्वर्ण यज्ञोपवीत सुहावे। कानों में कुण्डल झलकावे।।

काम रूप  बिजली सम तेजा। कर में लिये नाम नेता।।

कालनेमि का कपट हटाया। शाप दूर कर स्वर्ग पठाया।।

पाठ करे जो बार बतीसा। कृपा करें हनुमान कपीसा।।

लाल मूर्ति का ध्यान लगावें। तीन ताप से वह छूट जावे।।

चार पदारथ वह नर पावे। भजनी कहे मोक्ष हो जावे।।

कलियुग ताहि देत नहीं बाध। नाम जपे हनुमान आगाध।।

दोहा – सुख सम्पत्ति देना प्रभो, शरण गहे की लाज।

जय मारुति नंदन करें!  अहो गरीब निवाज।।

मंगलवार के दिन करे, नरनारी जो ध्यान।

अन्न धन कीर्ति चौगुनी बढै घनेरा मान।।