संजीवन

संजीवन

(तर्ज- दीदी तेरा देवर दीवाना…..)

बूँटी  लेके गढ़ लंका को आर्या।

हाय राम कृष्ण तीर सैंचके मार्या।। टेरा।।

कौन कहाँ का रहने वाला।

किसकी मौत का होवेगा गाला।

जल्दी बोलो किसका लाड़ दुलारा।

हाय राम कृष्ण….।।1।।

अंजना का लाला  लंका को जार्या।

लक्ष्मा के मेघनाथ ब्रह्मशस्त्र मार्या।।

आज्ञा श्री राम को निभर्या।

हाय राम कृष्ण….।।2।।

भरत वीर घणां करे पछताव।

हनुमान के झट पड़के पाँव।।

रो रो करके आँख भिगार्या।

हाय राम कृष्ण….।।3।।

मेरी बाण  पै बैठो  तज शंका को।

एक श्यात में पहुँचा दूं गढ़ लंका को।।

फूलचन्द कहै काज राम का सार्या।।

हाय राम कृष्ण….।।4।।