सीने में राम दर्शन

सीने में राम दर्शन

(तर्ज- माईन माईन मुडेर पे तेरे…. फि. हम आपके हैं कौन)

ताना रे ताना विभीषण का, जिसको नहीं सुहाया।

भरी सभा में फाड़ के सीना, हनुमत ने दिखलाया,

ओ बैठ राम राम राम… सीताराम  राम राम…जय श्रीराम।।टेर।।

देख राम सीता की सूरत, लंक पति घबराया।

धन्य है रे बजरंगी उसको, जिसका तू है जाया।

जय श्री राम राम राम …. जय श्री …..

शर्मिन्दा हो लंकपति ने अपना शीश झुकाया।

भरी सभा में फाड़ के सीना, जब बजरंग ने दिखाया।

बैठ राम राम …. सीताराम…

देख भक्त की भक्ति सीता बोली सुन ओ लाला।

अजर अमर होगा तू जग में, वर इनको दे डाला।

जय श्री राम राम राम …. जय श्री …..

तुम त्रेता में तुम द्वापर में, तुम ही हो कलियुग में।

आना जाना जग वालों का, तुम रहते हो हर युग में।

जय श्री राम राम राम …. जय श्री …..

‘राजपाल’ बजरंग ही जाने, बजरंगी की माया।

भरी सभा में फाड़ के सीना जब बजरंग ने दिखलाया।

बैठ राम राम …. सीताराम…