हनुमानजी से विनय

हनुमानजी से विनय

(तर्ज – मैं हूँ छोरी मालण की मेरी कमर पे….)

कर कर खोट काम डूबग्या, आज बचाने वाला तूू-2

ओ बाबा बजरंगी।। टेरा।।

काम, क्रोध, मद, मोह, माया, और फँसग्या तेरी मेरी में।

सत संगत में आणा भूल्या, काट भ्रम का जाला तू।

ओ बाबा बजरंगी।।1।। कर कर……

दीन हीन का गला घोंटके, धन की गांठ बणाई री

निर्धनियों के घर घर जाके, अर्थ लुटाने वाला तू,

ओ बाबा बजरंगी।।2।। कर कर……

खोटी करी कमाई, ब्याज से चिण लिये महल अटारी री।

रामचन्द की पंचवटी में, मुझे बसाने वाला तू,

ओ बाबा बजरंगी।।3।। कर कर……

त्याग जगत के खोटे करतब शरण तिहारी  आग्या री।

ॅफूलचन्द तो कलम उठावे, तान बताने वाला तू,

ओ बाबा बजरंगी।।4।। कर कर……