हनुमान महिमा

हनुमान महिमा

(तर्ज: गोरे मुखड़े पे काला काला चश्मा…..)

बड़े बड़े मुनि थारी जानी हनीं रचना।

सच्चे मन से भगत मनावे करे नित जपना।।

।।टेर।।

बालकपन में करया कमाल, भानु को समझा फल कोई लाल।

पकड़ हाथ से बाला ने झटपट मुँह में लिया डाल।

दुनियां में अंधकार भया, छोड़ करी जन जन पे दया।

संत महात्मा योगी तपस्वी करी थी गर्जना।।

बड़े बड़े मुनि …..

रावण दुष्ट अन्यायी, माता सिया चुरायी।

लंका जाके सुधि लाये, सात समुद्र खाई।

लांघ दई बांध नहीं अटके, मद में सीताराम रट रटके।।

निशाचरों की खैर करी नां अक्षय कुमार खपना।।

बड़े बड़े मुनि …..

लंकपुरी का किया नाश, असुरों का बंद होग्यां सांस।

भय के मारे दुबक गये, कोई बली न आया पास।

अग्नि की उठी चिंगारी, तन धन की हुई हानि भारी।

करामात देख सभी में हा-हाकार मचना।।

बड़े बड़े मुनि …..

मेघनाद से हुआ दगा,  लखन के शक्ति बाण लगा।

पहाड़ हाथ पर धरके आए, बेहोश में वीर जगा।

ॅफूलचंद पाई नहीं तेरी भक्ति, संयम, नियम और साधु संगति।

प्रकाश ‘चंद्राणी’ सुबह शाम करता अर्चना।

बड़े बड़े मुनि …..